लखनऊ, 5 जून (शुक्रवार) विधि संकाय, शिया पीजी कॉलेज स्थित विधिक सहायता केंद्र द्वारा आज ग्राम पंचायत मंझी निकोरजपुर, तहसील मलिहाबाद, जिला लखनऊ को गोद लेने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है। 
एमओयू पर विधिक सहायता केंद्र की ओर से निदेशक तथा ग्राम मंझी निकोरजपुर की ओर से ग्राम प्रधान ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर डॉ वहीद आलम ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A राज्य को यह निर्देश देता है कि वह सभी नागरिकों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हुस्न आरा खातून मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि निःशुल्क विधिक सहायता नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात में है कि कोई भी व्यक्ति केवल अशिक्षा या आर्थिक तंगी के कारण न्याय से वंचित न रहे।
उन्होंने आगे कहा कि विधिक सहायता केंद्र समाज के वंचित वर्ग तक न्याय पहुंचाने और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह एमओयू ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
उप निदेशक ने बताया कि केंद्र की ओर से समय-समय पर ग्राम स्तर पर विधिक जागरूकता शिविर, संगोष्ठी और रैलियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि ग्रामीण अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो सकें।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान रतीभान सिंह ने पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वे इस कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण विकास और जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
शिया पीजी कॉलेज के सूचना अधिकारी ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय के बाद शिया पीजी कॉलेज दूसरी संस्था है जिसने किसी ग्राम को गोद लेकर विधिक जागरूकता और निःशुल्क सहायता की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि संस्थान हमेशा समाजहित में कार्य करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।
इस अवसर पर अधिवक्ता अजय यादव, लालता प्रसाद, आशीष यादव, छोटू रावत सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे और इस ऐतिहासिक पहल के साक्षी बने।