लखनऊ। वन टाइम टैक्स (ओटीटी) अध्यादेश के विरोध में प्रदेश के विभिन्न टैक्सी संगठनों ने बुधवार को संयुक्त बैठक कर अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं। सभी संगठनों ने मिलकर यूनाइटेड टैक्सी ऑपरेटर्स प्रोटेक्शन फ्रंट, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। इस संयुक्त मोर्चे के संयोजक रवी आनंद, जो टीटीओडब्ल्यूए संगठन के उपाध्यक्ष हैं, ने बताया कि टैक्सी संचालकों की समस्याओं को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। परिवहन आयुक्त की गैरमौजूदगी में एडिशनल कमिश्नर (राजस्व) श्री विश्वकर्मा से प्रतिनिधिमंडल की लंबी बैठक हुई। बैठक में पियूष गुप्ता, रवी आनंद, राजीव अरोरा, अजय सिंह, मनीष निगम, सुनील सच्चर और शशि भूषण सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने ओटीटी अध्यादेश के विभिन्न बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग में कहा गया कि पुरानी टैक्सी वाहनों पर पुरानी कर व्यवस्था लागू रखी जाए और नई वाहनों पर नई व्यवस्था लागू की जाए।

साथ ही इसे वैकल्पिक (ऑप्शनल) किया जाए, ताकि टैक्सी धारक अपनी सुविधा अनुसार किसी भी प्रणाली के तहत टैक्स जमा कर सकें। दूसरी मांग में प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक शासन स्तर पर संशोधन नहीं हो जाता, तब तक टैक्सी संचालकों को एक तिमाही का टैक्स जमा करने की अनुमति देकर राहत दी जाए। तीसरी प्रमुख मांग यह रही कि अध्यादेश लागू होने के बाद भारी-भरकम पेनल्टी के कारण प्रदेश भर में जिन वाहनों को अन्य जिलों में सीज या चालान किया गया है, उनकी पेनल्टी तत्काल माफ की जाए और संबंधित थानों को वाहनों की रिहाई का आदेश जारी किया जाए। बैठक के बाद एडिशनल कमिश्नर (राजस्व) श्री विश्वकर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सभी मांगों को गंभीरता से समझा गया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही पत्र के माध्यम से शासन को अवगत कराकर आवश्यक संशोधन कराने का प्रयास किया जाएगा। टैक्सी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि शासन स्तर पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा, जिससे प्रदेश के हजारों टैक्सी संचालकों को राहत मिल सके।