लखनऊ। शिया पीजी कॉलेज में रविवार को विधिक सहायता केंद्र, विधि संकाय और लॉ लिशियस लीगल कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में अंतर महाविद्यालयीय एवं विश्वविद्यालयीय भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का विषय “भारत में महिलाओं से संबंधित कानून काफी हैं या नाकाफी?” रहा। इसमें विभिन्न कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के 50 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया, जबकि 68 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था।

विधिक सहायता केंद्र के निदेशक डॉ. वहीद आलम ने कहा कि प्रतियोगिता की वास्तविक सफलता केवल पुरस्कार में नहीं, बल्कि विचारों को तार्किक, तथ्यपूर्ण और प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता विकसित करने में है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और कानूनों पर विद्यार्थियों के बीच तथ्यपरक विमर्श को जरूरी बताया। उप निदेशक डॉ. उग्रसेन वर्मा ने कहा कि हार के डर से प्रतियोगिता में भाग न लेना ही वास्तविक हार है। डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने ऐसी प्रतियोगिताओं को विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए उपयोगी बताया।

लॉ लिशियस लीगल कमेटी के फाउंडर विवेक दीक्षित ने कहा कि प्रतियोगिता विद्यार्थियों को महिलाओं से जुड़े कानूनों, उनके प्रभाव और व्यावहारिक चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने का अवसर देती है। प्रतियोगिता तीन चरणों—प्रथम चरण, सेमीफाइनल और फाइनल—में हुई। निर्णायक मंडल में अधिवक्ता अगाथा शुक्ला, सिद्धार्थ शंकर दुबे, अमन त्रिपाठी, हरिगोविंद दुबे, सृष्टि पाठक और शताक्षी द्विवेदी शामिल रहे।

प्रतियोगिता में आकांक्षा मिश्रा ने प्रथम, निर्भय सिंह ने द्वितीय और निदा खान ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को मोमेंटो और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के अधिवक्ता नीतीश तिवारी और सौम्या तिवारी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्राचार्य/इंचार्ज विधि संकाय प्रो. (डॉ.) एसएस सादिक हुसैन आबिदी ने अतिथियों का आभार जताया और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। संचालन युसरा खान और शरवीन सैय्यद ने किया।